Ravi ki duniya

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Tuesday, February 25, 2014

व्यंग्य : खो गया है मेरा (साब का) सांड



                                               

लो जी ! जिसका डर था वही बात हो गयी. भैंसे, कुत्ते आदमी, बच्चे गुम होते और चोरी होते सुने थे पर यहां तो हमारे साब का सांड ही खो गया. भगवान जाने खोया या चोरी हो गया. यूं तो बहुत से गाय भैंस वालों की उस सांड से जाती दुश्मनी थी. अब साब के दफ्तर-बाहर का दो-चार सौ का अमला उसे खोजने में क्या लगा, बुरा हो इन प्रेस, टी.वी. वालन का पूरा दिन उसी पर प्रोग्राम दिखाते रहे. मन तो करता है इन सब को उसी सांड के आगे डाल देवें. फिर देखें कैसे खिसर खिसर करते हैं सारी कचर कचर भूल जायेंगे हां !.  उहां हमारे साब ने जब से सांड खोया है अन्न का दाना मुंह में नहीं रखा और हियां ये मीडिया वाले नाक में दम किये हैं. उसका नाम साब बड़े प्यार से प्लेबॉय रखे थे. अब गाँव-देहात के आदमी प्लेबॉय तो क्या आता कहना सब प्ले भाई... प्ले भाई कह कर पुकारते रहे उसे, जो है सो. पूरे के पूरे कस्बे में हाहाकार मचा हुआ है. साब को पता चला तो कोठी के तमाम दस-बीस नौकरों को वो गरियाये.. वो गरियाये सब याद रखेंगे. काम धाम कोऊ है नहीं सारा दिन सांड की तरह... सॉरी गधे की तरह हाँडते रहते हैं. इलाके के थानेदार एस.पी., डी.एस.पी. सभी आये रहे, हाथ बांधे खड़े रहे. साब तो खरी खरी सुना दिये हैं बिटवा बिना सांड लौटे तो सबकी ट्रांसफर...सब के सब लाइन हाज़िर...नालायक नाकारा कहीं के. एक प्ले भाई नहीं ढूंढ सकत नागरिकन की देखभाल क्या खाक़ करेंगे.

काहे कि सांड हमारे बड़े साब का रहिन सो तुरत फुरत वायरलैस मैसेज कराया गया. पूरा ज़िला भर को मुस्तैद रहने का हुक़्मनामा जारी कर दिया गया है, ऐसिन समझो कर्फ्यू से बेसी हालत हुई गई है शहर भर में. आसेपासे के चारों डिस्ट्रिक्ट की पुलिस सब काम छोड़ इसी में बिज़ी है. बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स सी.आर.पी.एफ., जी.आर.पी. खुफिया पुलिस सब इसी काम में लगे हैं. दनादन मैसेज पर मैसेज  आये जा रहे हैं वहां साइट किया गया... फलां जगह निशान, फलां जगह गोबर, फलां जगह पग मार्क मिलते हैं वगैरह वगैरह. कोई कहे स्टेशन की तरफ देखा गया, कोई कहे सब्ज़ीमंडी की तरफ जाते देखा गया था.

साब के लाख मना करने पर भी किसी के मुंह से टेलीफोन पर निकल ही तो गया “अभी साब से बात नहीं हो सकत है..... साब का सांड खो गया है... कि राम जाने चोरी अपहरण का केस है”. बस आनन फानन में टी.वी.वालन की आधा दर्ज़न ओ.बी. वैन आकर बंगले के चारों ओर खड़ी न हो गयीं और लगे... छोरा छोरी चिल्लाने  “यही है वो आलीशान बँगला जिसके एयर कंडीशन बाड़े में सांड प्ले भाई का रेजीडेंस  है ..... अब ये हैं गया प्रसाद जो सांड जी की सेवा में दो साल से तैनात थे उनसे बात करते हैं. आपके चैनल पर अपने प्यारे दर्शकों के लिये ब्रेकिंग न्यूज गया प्रसाद जी आपको प्लेभाई के जाने से कैसा लग रहा है ? क्या प्ले भाई एक दो दिन से उदास चल रहे थे. किसी चिंता डिप्रेशन में थे क्या ? उनकी किसी गतिविधि पर आपको कभी संदेह हुआ क्या ?” गया प्रसाद रो रो कर रुंधे गले से कुछ बोल नहीं सका. “ देखिये गया प्रसाद ने दो दिन से रो रो कर अपना चेहरा सांड कर लिया है.... सॉरी.... आई मीन चेहरा सुजा लिया है”

वहीं दूसरा चैनल कहीं और से उड़ान भर रहा था “ ब्रेकिंग न्यूज.... प्रत्यक्ष दर्शियों का कहना है कि उन्होने साब के सांड को खेतों में चरते देखा था. वो फसल चर कम रहा था, तहस-नहस ज्यादा कर रहा था, बिल्कुल साब की तरह. सांड हू ब हू  साब पर गया है वही चाल-ढाल, वही खाने का तरीका, वही फुंकार-हुंकार 

दिल्ली से डिजास्टर मैंनेजमेंट की टीम हैलीकॉप्टर से आ गयी थी. तमाम तरह के गैजेट्स, बेहोश करने वाली हारपून टाइप बंदूकों से लैस और नाइट विजन के बायनाकुलर्स के साथ. बैठकों के दौर जारी थे. समाचार लिखे जाने तक सांड जी पकड़े न जा सके थे. अलबत्ता लोगों ने विभिन्न स्थानों पर सांड को देखने की पुष्टि ज़रूर की. किंतु गौरतलब बात ये है कि एक  सांड एक ही समय पर विभिन्न स्थानों पर कैसे दिख सकता है. लोगों का मानना है कि वह कोई मामूली सांड नहीं है. उसमें दैवी शक्ति है. साब का सांड है साब की तरह उसकी मर्ज़ी कहां दिखे कहां न दिखे और अपनी पर आये तो एक ही वक़्त में जगह जगह दिखे.

जनसाधारण से अपील की जाती है कि सांड के बारे में सूचना देने वाले को साब की तरफ से भरपूर ईनाम दिया जायेगा. राज्य सरकार भी उसे सांडश्री  नामक पुरस्कार से नवाजेगी. 

                ढूंढो ढूंढो रे साजना ..ओ..
                मेरे साब का सांड लाड़ला     

1 comment:


  1. व्यंग्य अच्छा बन पडा है ! जब साब हैं तो उनका कुछ भि खो जाए , ढूंढना तो पड़ेगा ही नहि तो फ़िर साब होने क फ़ायदा ही क्य है ?

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