Ravi ki duniya

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Wednesday, October 20, 2010

मुहावरे इक्कीसवीं सदी के

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता :- सच ही है. मगर एक बार सोचो तो पता लगेगा कि अकेला क्या सारे चने मिल कर भी भाड़ न तब फोड़ सकते थे न आज. आजकल तो भाड़ होते नहीं. इसका आधुनिकीकरण यह हो सकता है कि अकेला पॉपकॉर्न मशीन नहीं तोड़ सकता है और न सारे पॉपकॉर्न मशीन तोड़ सकते हैं. यह जान लीजिए. मगर कल्पना कीजिये एक गर्म-गर्म अदद चना यदि भाड़ में से उछल कर भडभूजे की आँख भी फोड़ सकता है. आँख फूटी नहीं कि भाड़ फूटा. इसी तरह एक पॉपकॉर्न अगर मशीन में फंस जाये तो मशीन खराब. दूसरी और देख लीजिए १०० करोड़ मिल कर भी सरकार नहीं बदल सकते. एक बार कुर्सी मिल जाये तो सरकार आपकी ‘सेवा’ किये बिना हटती नहीं है. तभी तो बुजुर्गों ने कहा है कि सेवा करोगे तो मेवा मिलेगी और मेवा किसे प्यारी नहीं.


एकता में शक्ति :- बचपन में कहानी सुनी थी कि कैसे एक वृद्ध मृत्यु शैय्या पर था तो उसने अपने सभी बच्चों को बुलवा भेजा.पहले एक लकड़ी तुडवाई और फिर लकड़ी का गठ्ठर तोड़ने को कहा. वे तोड़ नहीं पाए और समझ गए कि एकता में शक्ति है. आज के टाइम में जब किसी वृद्ध ने अपने बच्चों को ऐसे ही समझाने के लिए लकड़ी मंगवाई तो मिली ही नहीं. सब जगह गैस-चूल्हे, हॉट प्लेट, माइक्रोवेव ओवन थे. वे जैसे तैसे खरीद कर लाए. एक-एक लकड़ी तुडवाई तो उन्होंने अनमने भाव से तोड़ दी. सोचा इनकी ग्रेच्युटी से काट लेंगे. इनकी आखिरी इच्छा पूरी कर दो. मगर जब पिताजी ने कहा कि गठ्ठर बाँध कर तोडो तो उनका सब्र जवाब दे गया. वो वैसे ही बूढ़े के मेडिकल बिल्स से तंग आ चुके थे. बडबडाने लगे. बूढा सठिया गया है. पागल हो गया है. हमारा टाइम खराब करता है. आव देखा न ताव और वो गठ्ठर बूढ़े के सर पे दे मारा. बूढा चल बसा.बच्चे जान गए कि एकता में शक्ति है. एक एक लकड़ी मारते तो बूढा मरता क्या ?






नाच न जाने आँगन टेढा:- ये तब की बात है जब डिस्को आदि नहीं थे. न कॉलेज थे न उनमें फेट- फेस्टिवल होते थे. न वेलेंटाइन डे होते थे और न डांस कम्पीटिशन. आज जब नुक्कड़ नुक्कड़ डांस कोचिंग चालू है. टी.वी. चेनलों पर अंकल-आंटी,बच्चे-बूढ़े सभी नाच रहे है तो यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि किसी को नाच न आता होगा. हो न हो जो नाच नहीं पा रहा है तो महज़ इसलिए कि आँगन टेढा है. नहीं तो आजकल के नचकैय्या तो बदन को ऐसे तोड़ मरोड़ के नाचते हैं कि उन्हें न ज्यादा जगह दरकार है न कपडे.






आज नकद कल उधार:- आज के क्रेडिट कार्ड और जेरो परसेंट ब्याज और आसान किश्तों के टाइम पर तो न आज नकद न कल नकद. आज भी उधार, कल भी उधार, परसों किसने देखा है. पहले बड़े-बूढ़े कहते थे कि भूखे सो रहो उधार मत खाओ. आज सब होटलों और रेस्टोरेंटों में क्रेडिट कार्ड चलते हैं. क्रेडिट कार्ड कहाँ कहाँ नहीं चलता. क्रेडिट कार्ड से आप क्या क्या नहीं खरीद सकते. क्या क्या नहीं कर सते. बस शमशान का विज्ञापन आना बाकी है ‘डाई टुडे पे लेटर’.






सस्ता रोये बार-बार महंगा एक बार :- आप ऐसा नहीं कह सकते. क्या आपने सर्दियों में जगह जगह पुराने गर्म कोट,पतलून और जर्सियों का अम्बार नहीं देखा. भला हो उन विदेशियों का जो आपकी दोहरी सेवा कर रहे हैं. न केवल सर्दियों में आपका तन ढांपते हैं बल्कि आपको इम्पोर्टेड फैशनेबल वस्त्र भी सस्ते दाम मुहैय्या करा रहे हैं. ताकि आप सदा हँसते-मुस्कराते, इठलाते रहें. वो इम्पोर्टेड सामान के लिए आपकी दीवानगी जानते हैं. इसलिए आज भी आपकी देख-भाल कर रहे हैं. अंग्रेजों ने यूँ ही नहीं भारतीयों को ‘व्हाईटमेंज बर्डन’ कहा था. फैशन स्ट्रीट हो या जनपथ, पूरे घर के वस्त्र खुले आम ‘थ्रो-अवे’ दाम पर मिल रहे हैं. आपको तकलीफ न हो इसलिए आपकी सुविधा के लिए सब वस्त्र केवल एक-दो को छोड़ कर ऐसे बना दिए हैं कि जनाना-मर्दाना का फर्क ही न रहे. ‘बाई वन गेट वन फ्री’ की सब और पुकार है तो कोई पागल ही सामान महंगा खरीदेगा. दरअसल सस्ता हँसे बार बार महंगा हँसे एक बार.






नेकी कर कुँए में डाल : आजकल कुँए तो रहे नहीं इसलिए शायद लोगों ने नेकी करना ही बंद कर दिया क्योंकि उन्हें समझ ही नहीं आता कि नेकी कर के कहाँ डालें. एक आध बार वाश-बेसिन या फ्लश में डाली तो सीवर लाइन ही चोक हो गयी. पहले नेकी बड़ी होती थी इसलिए कुँए में डालनी पड़ती थी.अब नेकी सूक्ष्म हो गयी है मगर फिर भी फंस जाती है. नेकी करनेवालों की भी मजबूरी है. इसलिए नया मुहावरा चला दिया. नेकी कर जूते खा. ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपने किसी के साथ नेकी की हो और उसने आपकी खाट न खड़ी की हो. वक्त पड़ने पर गधे को बाप बनाने की सनातन परम्परा तो सुनी थी. मगर काम निकल जाने पर बाप को भी गधा समझने की परम्परा मेरे भारत महान में ही है.

1 comment:

  1. उक्त मुहावरों की वर्तमान युग में जो हालत हो गयी है, उसका बड़ा सटीक चित्रण आपने खींचा है. विवरण अनोखा है किन्तु सत्य है. बहुत अच्छा लगा. रविन्दर जी, आपकी अनुमति से मैं उक्त विवरण को अन्यत्र प्रयोग करना चाहता हूँ - जी बिल्कुल आपका नाम देते हुए.

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